शीर्षक (चमत्कारी बाबा)
अंध अनुयायी कहते थे, राम रहीम है चमत्कारी बाबा।
न्यायालय में तो निकला वह बलात्कारी बाबा।
क्या जमाना आ गया भाई, न्याय में भी राजनीति है घुसती।
निरपराध, असहाय बेचारी जनता मुफ्त में है यहाँ पर पिसती।
एक बाबा की पेशी पर, पूरा देश बेचैन है दिखता।
राज्य सरकार बेशर्म, बेफिक्र बन कर चैन से सोती।
राज्य सरकार पर उसकी जिम्मेदारी क्यों नहीं है डाली जाती।
मुख्यमंत्री भी गुनहगार है पूरा, उसे क्यों नहीं शर्म है आती।
अनुयायियों की भी मत्त है गई मारी, भेड़ बनी हुई है जनता सारी।
ऐसे बाबाओं ने देश की तस्वीर बिगाड़ कर रख दी सारी।
ऊपर से दिखते भगवें बाबा, अंदर से है इनकी नीयत काली।
भोले भाले भक्त हैं मरते, बाबा ने इनकी अक्ल है मारी।
डेरे इनके बने हैं वोट का धंधा, और हैं यह मौत का फंदा।
परिमल कहे बंद करो यह फंडा, बाबाओं को न दे कोई चंदा।
सरकार का भी फर्ज हो निर्धारित, बंद करो वोटों का ये धंधा गंदा।
नंदकिशोर परिमल, गांव व डा. गुलेर
तह. देहरा, जिला. कांगड़ा (हि_प्र)
पिन. 176033, संपर्क. 9418187358