तम्हे दिल में अपने बसाया न होता
गमो का मेरे दिल पे साया न होता

कभी लगते ना दाग दामन पे मेरे
तुम्हे चाँद अपना बताया न होता

न होती मुहब्बत न ही दर्दे दिल ये
मेरा दिल अगर तुझपे आया न होता

समझ बैठे तुम को खुदा मुहब्बत का
ये सर काश हम ने झुकाया न होता

तसब्बर में रहते सदा ही मेरे तुम
चिरागे वफ़ा गर बुझाया न होता

धड़कते यूँ सीने में धड़कन के जैसे
अगर मेरे दिल को दुखाया न होता
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
6/5/2017
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