खेलो बच्चों/बाल कविता/युद्धवीर टंडन

खेलो बच्चों

पोथी कापी छोड़ के मजे ले लो बच्चों
पढ़ लिख कर तुम थक जाते हो रोज
आज के दिन अब खूब करो तुम मौज
कब्बडी खो खो जो चाहे वो खलो बच्चों

छोड़ो तुम सभी झमेलों को
बस्ते वस्ते छोड़ के कुछ पल
छोड़ के चिंता सारी तुम कल
नन्हें मुन्नों गले लगा लो खेलों को

छोड़ो अब इस लैप टॉप और मोबाइल को
बैठे बैठे थके नहीं तुम हुए नहीं क्या बोर
आके बाहर मैदान में दिखाओ अपना जोर
मत खोने दो अपनी प्यारी सी स्माइल को

मन में मस्ती और तन में ताकत हैं ये भरते
खेल खेल में बच्चों रोग हो जायेंगे दूर सभी
हंसी खुशी से स्कूल आ पाओगे तुम रोज तभी
ऐसे ही तो बच्चों सारे ही नम्बर वन हैं बनते

रोज खेलो जी भर के उच्छलो कूदो जी भर के
पकड़म पकड़ाई छप्पन छपाई या चोर सिपाही
किसने किसको पकड़ा धफा हुआ है कौन भाई
निडर हो तुम खेलो जीतोगे कैसे यूँ ही डर के

जय हिन्द …

युद्धवीर टंडन (कनिष्ठ आधारभूत शिक्षक रा. प्रा. पा. अनोगा) गावं तेलका जिला चम्बा हि. प्र. पिन कोड 176312 मोब. 78072-23683

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