धर्म के नाम पर धोखा

इंनसानियत की भूमि पर,
हैवानियत के बादल मंडरा रहे हैं,

धर्म का चोला पहन,
इंनसानियत का अपमान कर रहे ,

धर्म का धंधा करने वाले,
आस्था और भक्ति बदनाम कर रहे ,

लाचारों को गुमराह कर,
अपना साम्राज्य बना रहे हैं,

भक्ति के नाम पर ,
विवेक मिटा सही गलत की समझ मिटा रहे,

यह कैसा धंधा भगवान के नाम पर,
मासूम जिंदगियां लगा रहे दांव पर,

ईश्वर की बात करनेवाले,
यह कैसा खून बहा रहे है,

संन्यास की बात करने वाले,
यह कैसी बेशर्मी की हदें पार कर रहे,

इंनसानियत और सेवा का पाठ पढ़ाने वाले,
परदे के पीछे यह कैसा अधर्म का खेल खेल रहे हैं।

वीपी ठाकुर