मिला कर नज़र हम नशा कर चले
मुहब्बत में दिल हम लुटा कर चले

बसा कर निगाहों में अपनी तुझे
दिले दर्द खुद ही बढ़ा कर चले

सिवा दर्द के ज़िन्दगी कुछ नहीं
हमें राजे दिल वो बता कर चले

किसे कद्र है अब वफ़ा की यहाँ
वफाओ कि हम जो खता कर चले

सितम चाहे कर दिल पे जितने मेरे
ख़ुशी की तेरे हम दुआ कर चले

नहीं आँसु की कोई कीमत रही
तेरी तुझसे ही हम गिला कर चले
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
2/5/2017
आई – 11 पंचशील नगर
नर्मदा रोड ( जबलपुर म,प्र, )