गीत
बढ़ता ही जा रहा है हरपल मलाल मेरा
मेरी सादगी के कातिल है ये कमाल तेरा

गुजरे ज़माने पर न गुजरे ये रात मेरी
पैमाने ग़म के पीना स़ाकी औकात मेरी
आए आंखों में जो आंसू लाये ज़माल तेरा

बढ़ता ही जा रहा——————–

ज़ज्बात मेरे रूठे तुमसे जो ख़्वाव टूटे
रूह तो लहू हुई है कट कर जो घाव टूटे
तड़पाये जा रहा है फिर भी ख्याल तेरा

बढ़ता ही जा रहा ————————

शीशा-ए-दिल है टूटा मुझ से खुदा है रूठा
साया भी मेरा साथ न देखो जुदा है रूठा
पर सामने खड़ा है अब भी सबाल तेरा।

बढ़ता ही जा रहा ————

मोनिका शर्मा सारथी