जशन -ए -आजादी कैसे मनाऊँगा मैं/डॉ सुभाष सोनू

भारत का खजाना पत्रिका के माध्यम से सभी साथियों एवं पाठकों के लिये अपनी एक नई नज़्म “जशन-ए -आजादी कैसे मनाऊँगा मैं” पेश कर रहा हूँ l
उम्मीद करता हूँ की आप इसे पसंद करेंगे और अपना प्यार देंगेl

जशन -ए -आजादी कैसे मनाऊँगा मैं ll

जशन -ए -आजादी कैसे मनाऊँगा मैं l
बेबसी तेरी किसको सुनाऊँगा मैं l

नोचकर खा रहे तुझको अपने तेरे l
तू लहू से सना है ऐ भारत मेरे ll
तेरे ज़ख्मों को कैसे छुपाऊँगा मैं l
जशन-ए -आजादी कैसे मनाऊँगा मैं ll

एक वो लोग थे जो तुझपे कुर्बां हुए l
आज लोगों ने तुझको है कुर्बां किया ll
बदले हालात किसको सुनाऊँगा मैं l
जशन -ए -आजादी कैसे मनाऊँगा मैं ll

तेरे कशमीर की बोलियां लग रही l
हर हुकूमत तुझे जाने क्यूँ ठग रही ll
तू है लाचार किसको बताऊँगा मैं l
जशन-ए – आजादी कैसे मनाऊँगा मैं ll

गैरों ने लूटकर तुझको छोड दिया l
हाल अपनो ने तेरा क्या देख किया ll
लुटता है रोज़ तू सह न पाऊँगा मैं l
जशन – ए – आजादी कैसे मनाऊँगा मैं ll

हर कोई भर रहा अपनी ही झोलियां l
घर के भेदी हैं बैठे बना टोलियां ll
खतरा अपनो से है क्या बताऊँगा मैं l
जशन – ए – आजादी कैसे मनाऊँगा मैं ll

हो मरम्मत तेरे ज़ख्मों की ऐ वतन l
ऐसा मरहम कसम है ले आऊँगा मैं ll
मुस्कुराएगा फिर से तू जब ऐ वतन ll
जशन – ए – आजादी उस दिन मनाऊँगा मैं ll

बेबसी तेरी किसको सुनाऊँगा मैं ll
तेरे ज़ख्मो को कैसे छुपाऊँगा मैं ll
तू है लाचार किसको बताऊँगा मैंll
जशन-ए – आजादी कैसे मनाऊँगा मैं ll
डा. सुभाष सोनू

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