अकेला पन…………

कड़ी धूप और बरसात में रोज़ व्यस्त रहता हूँ
हर दिन हर पल अपने आप में खोया रहता हू

कुछ पल के लिये यहाँ सब मिलते है
कुछ पल में ही सब छोड़ देते है

अकेला पन मुझको बहुत सताता है
रात भर उसका चेहरा पास आता है

जी रहा हूँ में यहाँ अपने आप में
फ़िर से वो आये चुप चाप से

दिल लगी दिल के धड़कने से नही दिखती
आँखों के झुकने वह नज़रों के मिलने पर ही दिखती है

प्यार की बातें शब्दों के बोल से नही बोले जाते
बल्कि दिल की धड़कन से महसूस किये जाते है

अकेला पन न जाने कब तक यूँ ही मेरे साथ रहेगा
जान है तो जहान है अकेला पन सदियों की पहचान है

कियोंकि अकेले सब ने आना है अकेले सब ने जाना है
प्रकृति के बनाये उसूलों को सबने यहाँ निभाना है

राम भगत