उनके यहाँ/कविता/डॉ कंवर करतार

उनके यहाँ

जो लोमड़ी सी जुबान रखते हैं
गिद्ध सी होती है जिनकी नज़र
और बन्दर की तरह
बाँट किया करते हैं
वे मदारी बन
नचाते हैं जमाने को
उनके यहाँ
शरमा जाती है गिरगिट भी
कौआ भी हतप्रभ-
पाता है लुटा हुआ
भोंकने बाले कुत्ते
ख़ामोश हो जाते हैं
चुसी हड्डी के टुकड़े पर भी
और संवेदनाएं स्वतः ही
घोंट लेती हैं गला अपना
फुद्क -फुद्क कर
रस्सी से बंधे मेंडक की तरह
डॉ कंवर करतार

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