आस्था का आतंक

दहशत में है आमजन
अपने प्रपंच को
आस्था का नाम देकर
उसने खड़ी कर दी
मानसिक अपाहिज
अंधभक्त आतंकियों की फ़ौज l

सुलगा दिए
कितने ही शहर
बहाकर खून
बेकसूरों का
पुष्टि कर दी स्वतः ही
स्वयं के किए गुनाह की !

राम – रहीम के नाम का
चोला पहने
वह नहीं हो पाया
मात्र इंसान भी
आध्यात्मिकता की आड़ में
वह सींचता रहा
राष्ट्रद्रोह के बीज l

इंसानियत के खुशहाल और
उपजाऊ खेतों में
खरपतवार जैसा
उग आया है
आस्था का आतंक
उखाड़ना होगा
जिसकी गहरी समा चुकी
जड़ों को l

ताकि लौट सके
हरियाली
लहलहा सकें फसलें
सुकून की
बचाया जा सके
आदमियत की उर्वरा भूमि को
बंजर हो जाने से !

25 अगस्त, 2017 को पंचकुला में हुई आगजनी और हिंसा की घटना पर l