किसी भी गैर से ख़ुशी की चाह मत करना
यूँ ज़िन्दगी को कभी तुम तबाह मत करना

सभी के मन में यहाँ छल कपट मिलेगा
किसी पे कर के भरोसा पनाह मत करना

झुकाना पड़ जाये सर शर्म से कहीं तम्हे
कभी ऐसा भूल कर तुम गुनाह मत करना

मिले कभी जो मुहब्बत में जख्म तुम्हे भी
समझ सिला ये वफा का तु आह मत करना

गुजार वक्त गरीबी में सुकूँ कर लेना
तलाशे धनमें यूँ गफलत की राह मत करना

यही कही पे मिलेंगी ये मंजिले तुमको
मिले लिखा नसीबों का ,अथाह मत करना
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
4/5/2017
आई – 11 पंचशील नगर
नर्मदा रोड ( जबलपुर म,प्र, )