जलन

__ डॉ.पीयूष गुलेरी
जलन सिर्फ आग या___
ज्वलनशील पदार्थ में नहीं होती
अंतर में भी पलती है
बहुत फलती है
आंतरिक जलन होती है प्रचंडभयंकर
प्रलयंकर ।
बड़े-बड़ों को पालती है
अंतरतम को सालती है
और/उसका प्रवल वेग
कुछ भी कर गुज़रने को करता प्रेरित
यह जलन मात्र भौतिकवादी ही नहीं
इसकी गति /जीवन जगत साहित्य और
अध्यात्म तक घुसती है।
ऋषि, मुनि,देव/करते हैं दानवी व्यवहार
आत्मघाती प्रहार/ होते हैं शिकार
आंतरिक जलन के
करते हैं कहर / रोपते ज़हर/घोंपते खंजर
फिर तो भले आगे
दयानंद सरस्वती ही क्यों न हों ।
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अपर्णा-श्री हाऊसिंग बोर्ड कालोनी
चील गाड़ी धर्मशाला हिमाचल-प्रदेश
पिन १७६२१५

लड़ने का हुनर****
डॉ.पीयूष गुलेरी
लड़ने का हुनर
हां लड़ने का हुनर,कोई सीखे
तो तुम से ही सीखे
भारत की सरज़मीं पे रहकर
उसका खाकर /सीमा पर जाकर
नापाकी गुण गाकर , दुश्मन को सुहाकर
बढ़ाकर पींगें/ मारते डींगें
ढो रहे पत्थर, मार मार पत्थर,होगये पत्थर,
नाडूखां बनते हो, और खूब तनते हो ।
यह ________
यह कौन-सी लड़ाई, नापाक भाई
तुम्हें है सुहाई .
भारत की धरती, पोषण जो करती
उसी का शोषण !!!
मांगते आज़ादी, जिसे दशाब्दियों पूर्व
किया था हासिल
हमारे तुम्हारे बुज़ुर्गों ने
______००________
अरे!ओ!! कुकर्मियों,देश के विथर्मियों
ख़ूनी दरिंदो, नापाकी परिंदो
देश के अंदर पृथकतावादी
हो कर नि:शंक , मचाते आतंक
मारते पत्थर,भागते पत्थर, हो गये पत्थर ।
ख़ूखार कोबरे, इच्छाधारी सर्प
मानसगंथी अजगर/मारते पत्थर
बड़ा ही भयंकर,यह प्रलयंकर
कैसा है, कैसा है यह !!!
हुनर लड़ने का ?
लड़नै का हुनर ??
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____अपर्णा -श्री, हाऊसिंग बोर्ड कालोनी,
चील गाड़ी, धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश
मो.९४१८०१७६६०
दू,भा, ०१८९२२२६२२४