माँ /कविता/राम भगत नेगी

…………..माँ……..

माँ तेरा आँचल सबसे न्यारा
माँ तेरा गुस्सा बहुत प्यारा
तस्वीर देखु जब भी
माँ डाँट याद वो आता है

लौट आऊं क्या फ़िर से बचपन में
जवानी के शितिज से निकल कर
तेरा गाना रूट जाऊँ तो वो मनाना
तस्वीर देखु जब भी
माँ वो प्यार याद आता है

अभी व्यस्थ हूँ अपने जीवन में
जो संसार तुमने है दिखाया
काश में अंधा ही होता
माँ तेरे पास तो में होता
तस्वीर देखु जब भी
माँ वो दुलार याद आता है

धीरे धीरे गुजर रही है जिंदगी
माँ आशिर्वाद जो है तेरा
पास जब आऊं तो
बस वही बचपन में लौट देना
तस्वीर देखु जब भी
माँ वह बचपन याद आता है

जिंदा हूँ अभी तेरी सांसे जो साथ है
जी रहा हूँ भीड़ में तेरी तेरी धड़कन जो साथ है
भटक जाऊँ कभी दुनियाँ के भीड़ में
माँ मुझको राह दिखाना
तस्वीर देखु जब भी
माँ वो सलाह तेरी याद आये

विनती है प्रभु मेरी माँ का प्यार
यूँ ही मिलता रहे
जो खुशी किसी को न मिले
वो मुझको ही मिले
i love u mom…
राम भगत

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