गजल
ताउम्र इन्तजार करना हमारी मजबूरी है,
हमारे मिलन में बस एक जन्म की दूरी है |
खुशियों के दौर में भुला देते हैं खुदा को,
तभी तो जिंदगी में गमों का होना ज़रूरी है |
मेरे हर लफ्ज में खुशबू है तेरी,
तेरे ज़िक्र के बगैर मेरी गजल अधूरी है |
फुरसत मिली तेरी जुल्फें भी सुलझा दूंगा,
उलझनें ज़िन्दगी की सुलझाना भी जरूरी है |
फना हो जाना ही इन्तहा है मुहब्बत की,
मिटना शमा की जलना परवाने की मजबूरी है |
दिल की बात निगाहों से ही पढी जाती है,
मुहब्बत में भी कुछ तो रस्में जरूरी है |
हर सांस तेरा नाम ले के ही चलती है सुधांशु,
नब्ज का चलना तो खुदा की मंजूरी है |
संजीव कुमार सुधांशु
गांव व डाकघर च्वाई
त. आनी जिला कुल्लू (हि. प्र.)
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