वो बात क्या थी,
जो ना कह सके तुम..
गुम से रहे,
जब भी मिले तुम…

वो इशारों में झुक के ,
यूँ हँस कर मिलते थे कभी,
क्या था वो,
ना समझ सके हम,

(वो बात क्या थी,
जो ना कह सके तुम
गुम से रहे,
जब भी मिले तुम)

यूँ ही मुस्कुरा के तुम,
जो चले जाते थे..
जब भी तन्हा हुए,
तुम याद आते थे..

वो तेरे लवों पे धीरे से आई हँसी,
ना जाने क्या जादू तुम कर जाते थे..
जब भी हम तन्हा हुए,
तुम याद आते थे..
तुम याद आते थे..
राहुल सुन्दन
चुवाडी, जिला चम्बा