तनहाई को और भी तनहा होने दो
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हंगामा दिल में अब भी कुछ बाकी है l
रफ्ता-रफ्ता हर धड़कन को सोने दो ll
मैं सुन पाँऊ उसको अपने ही अंदर l
तनहाई को और भी तनहा होने दो ll

तेरे जोग में ढ़ल जाऊँगी में जोगन l
खुद से बेखुद मुझे मुसलसल होने दो ll
तू ही तू होगा बस मेरी सांसों में l
तनहाई को और भी तनहा होने दो ll

जगता है तू मुझमे जब में सोता हूँ l
मेरी नींद को और भी गहरा होने दो ll
सन्नाटा कर सरगोशी अब कहता है l
तनहाई को और भी तनहा होने दो ll

तनहाई ने मुझको मुझ से मिलवाया l
सुबह का भूला शाम को घर वापिस आया ll
कहता रहता हूँ अब में भी बस सबसे l
तनहाई को और भी तनहा होने दो ll

ड़ा. सुभाष सोनू l