उजाला कीजिये ??

शीशा-ए-दिल टूटेगा जी मत उछाला कीजिये ।
दस्तार पुरानी पूर्वजों की है सम्हाला कीजिये।।

ज़िंदगी है चार दिन की चमक कहते हैं यहाँ ।
वक्त जो निकले यहाँ हँस के निकाला कीजिये।।

चाँद-तारे कौन देगा थाल में रख कर भला ।
खुद दिया बन जाइये जी खुद उजाला कीजिये।।

माना फ़ुर्सत ही नहीं है अब किसी भी के लिये।
फ़िर भी इंटरनेट से टाइम निकाला कीजिये।।

दीद-ए-तर हो अनिल पलकों में दबकर ही मगर।
होठों पे इक ख़ुशनुमा मुस्कान ढाला कीजिये।।

? सुप्रभातम् ?
पं अनिल
अहमदनगर महाराष्ट्र
? 8968361211