व्यंग्य रचना

ग़ज़ल नुमा कबिता

मतलव की मत बात करो यह लोकतंत्र है
भ्रष्टाचारी सौगात भरो यह लोकतंत्र है।

भूख गरीवी औ’ मंहगाई सारे तेरे अपने हैं
सबको आत्मसात करो यह लोकतंत्र है

बढ़ी मंहगाई बढ़ने दे तूं क्यूं लाल पीला है
पे पीठ के साथ करो यह लोकतंत्र है

कुर्सी की महिमा को प्यारे है मेरा शत शत प्रणाम
जियो इसी के साथ मरो यह लोकतंत्र है

सुनता नहीं तुम्हारी कोई भारत बंद मना डालो
पत्थरों की बरसात करो यह लोकतंत्र है

लंवे भाषण झूठे आश्वासन जनता की झोली में डाल
दु:ख उनके मत ज्ञात करो यह लोकतंत्र है

हर दफतर हर टेवल से जेबी रिश्ता कायम कर
फिर दिन को चाहे रात करो यह लोकतंत्र है

मौलिक अधिकारों को तुम अपना मत समझ लेना
मिलने की मत आस करो यह लोकतंत्र है

गिरने दो चरित्र “निराश” दोष औरों के मत्थे मढ़
सबसे बिश्वासघात करो यह लोकतंत्र है

सुरेश भारद्वाज निराश
धौलाधार कलोनी लोअर बड़ोल
पीओ दाड़ी, धर्मशाला हिप्र
176057
मो० 9418823654