ये किस कदर वो प्यार का इज़हार कर गई l
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ये किस कदर वो प्यार का इज़हार कर गई l
इक तीर-ए -नीमकश से दिल पे वार कर गईll
गालिब को जो ख़लिश कभी हुई थी दोस्तो l
मुझको उसी ख़लिश का वो शिकार कर गईll

उस शोख हसीना पे मेरी कब से थी नज़र l
बस रोज़ बैठा रहता था में उसकी रहगुज़र ll
हुआ करम के अबके आँखे चार कर गईl
ये किस कदर वो प्यार का इज़हार कर गई ll

जन्नत का नज़ारा है मैने यारो पा लिय l
उस रश्क-ए-कमर ने मुझे अपना बना लिया ll
कितने ही दिलों को वो तार तार कर गईl
ये किस कदर वो प्यार का इज़हार कर गई ll

इबादतों का मेरी आज फूल खिल गया l
था मेरा ना कभी वो आज मुझको मिल गया ll
मझधार में फसा था मुझको पार कर गईl
ये किस कदर वो प्यार का इज़हार कर गई ll

डा. सुभाष सोनू
09-08-2017