चिन्तित हूँ/जग्गू नोरिया

चिन्तित हूँ

जालू भी दिखदा है यह
बदिया बनाया घर दसदा सैह

ओंन्दे परोने बढ़िया होंदे विच्छोने
पूछी पूछी सेवा भाव दसदा सैह

लाड़िया कदी बच्याँ गलाँदा
सारयाँ ने गल करादाँ सैह

इक इक गल दा व्खान करदा
किदया लगा घर पुछदा सैह

बाथरूम स्टोर सारे दसदा
कणे मन्द मन्द हसे सैह

मन मेरा दुखदा दसी नी माँ
कुसी कौने बैठी दिखी नी सैह

लोक दिखदे रे घरे मैं सोचदा
कुत्थु होंगी इस लाल दी माँ

खाई पी दे बधाई सब गये
पर गल वार वार मन आये एह

मिन्झो ताँ दिखनी है बुढी माँ
छानी छानी दिखी हर घरे थाँ

दसी कुणी न नजरी आई माँ
विन दिखे कियाँ वापिस आँ

परेशान थोड़ा बैठा इक थाँ
सामने सुजी गराला बैठी माँ

मन टुटी गिया कलेजा फुटी गया
लाहनत हो लोको तुसाँ जो

खुशियाँ मनाई चली गये खाई
पुछया नी परेशान रखी क्यो माँ

हुण तुसाँ दसा विद्वानो मिंझो
कैणी नंगे करे “जग्गू” उन्हाँ

जिन्हाँ परेशान कित्ती है माँ
जग्गू नोरिया

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