समाज की प्रखर पहरेदार पुलिस

पुलिस ये शब्द सुनते ही दिमाग अपने अपने ढंग से सोचना शुरू करता है। कोई बुरा आदमी होगा तो डरेगा, कोई किसी मुसीबत में होगा तो उसमें होंसला जगेगा, माँ-बहन किसी सुनसान सड़क पर सुनेगी तो उसमें हिम्मत जुटेगी। ये सिर्फ एक शब्द का कमाल है जिसे हम “पुलिस” कहते हैं।

समाज में पुलिस की छवि को इस प्रकार से पेश किया जाता रहा है जैसे उनके अंदर प्रेम भाव न हो और न ही समाज मे उपयोगिता जबकि सच ये है कि कई बार अपने फर्ज की कीमत अपने खून से चुकाने वाले गुमनाम योद्धा बने रहते हैं पुलिस के सैनिक। आज मेरे इस लेख का अभिप्राय है पुलिस की एक ऐसी छवि से जनता को परिचित करवाना जिससे उनके अंदर पुलिस के प्रति भरोसा बढ़े और समाज को पुलिस की उपयोगिता का एहसास हो। क्योंकि अभी तक समाज मे पुलिस की भूमिका के बारे में बहुत कम लिखा गया है।
समाज का पहरेदार:-
समाज में पुलिस एक रक्षक और एक पहरेदार के समान है। हम अपने घरों में इसलिए आराम से सो जाते हैं क्योंकि आपको भरोसा है कि पुलिस है। देश की सीमाओं की रक्षा करने के लिए जिस प्रकार हमारे सैनिक दिन रात खड़े हैं वैसे ही घर के अंदर किसी प्रकार की अनहोनी न हो उसके लिए पुलिस के सैनिक खड़े हैं। सीमाओं पर तो फिर भी लड़ाई बाहर वालो से होती है जबकि घर के अंदर अपनो से जूझना किसी चुनोती से कम नही होता। इसलिए समाज का सशक्त पहरेदार है पुलिस का सिपाही।
माँ की ममता के समान:-
जब समाज मे कोई अनहोनी घटित होती है तो इंसान भगवान के बाद किसी को याद करता है तो वो है पुलिस । कभी सोचा ऐसा क्यों? आपका अगर एक्सीडेंट हो जाता है, कोई किसी मुश्किल में फस जाता है तो आप सबसे पहले 100 नम्बर घुमा कर पुलिस को बुलाते हैं। क्योंकि आपको ये विश्वास है कि इस समय भगवान के बाद कोई है जो आपकी मदद कर सकता है तो वो पुलिस है। उस समय पुलिस की जो भूमिका है वो एक माँ की भांति होती है जिसका सबसे पहले कर्तव्य है आपके प्राणों की रक्षा करना और पुलिस वही कार्य बखूबी करती है।
कठोर पिता बनना भी आवश्यक:-
कभी समाज मे उग्रता बढ़ जाती है । लोग अपना आपा खोकर कई प्रकार ऐसे अमानवीय ओर अनैतिक कामो को करने लगते हैं जो समाज के लिए घातक होते हैं उस समय समाज का हर अच्छा नागरिक ये उम्मीद करता है कि इस प्रकार के असमाजिक तत्वों पर रोक लगे और उस समय फिर पुलिस को याद किया जाता है और उस समय पुलिस का कार्य एक कठोर पिता के समान होना आवश्यक हो जाता है। और उसी कठोरता से ऐसे कार्यो में नकेल लगती है।

फर्ज की कीमत:-
पुलिस का ये कार्य कोई इतना आसान भी नही होता। आप घर मे अपने एक छोटे बच्चे को काबू करते करते परेशान हो जाते हैं यंहा तो समाज के कई उपद्रवियों को काबू में करना होता है। और इसी बीच कई बार पुलिस को जनता के आक्रोश का सामना भी करना पड़ता है मैं इस प्रोफेशन से तो नही हूँ पर समझ सकता हूँ शायद ये एक सबसे पीड़ादायी पल होता होगा एक पुलिसकर्मियों के लिए जब लड़ाई अपनो से हो तो जीतते भी अपने है और हारते भी अपने। कई बार सुनने को मिलता है कि लोगो की भीड़ ने पुलिस के ऊपर पत्थर बरसाये। ये पीड़ा दायक बात होती है क्योंकि कई बार फर्ज की कीमत खून से चुकानी पड़ती है।
रोमांचित और भयानक:-
24 घण्टे की ड्यूटी और कई बार कई कई दिन के आपरेशन पुलिस की नोकरी को रोमांचित ओर थकाऊ भी बना देते हैं। मेरे एक पुलिस के मित्र से मैंने बात की कि जॉब कैसी है तो
उसने बड़ी संजीदगी से पूछा
कभी मुर्दे के साथ सोया है भाई? मैं कल रात को सोकर आ रहा हूँ।”
तब मुझे एहसास हुआ कि रात को कमरे के बाहर हल्की सी आवाज आने पर हम सहम जाते हैं ओर ये मुर्दे के साथ सोता है। इसलिए तो समाज का रक्षक कहलाता है पुलिस का सिपाही।
समाज की उम्मीदें:
समाज ये उम्मीद रखता है कि पुलिस उसकी रक्षा करेगी तो समाज को ये भरोसा भी रखता है कि उसकी उम्मीद कभी टूटेगी नही। यही कारण है कि समाज मे कुछ अनहोनी होने पर और उचित कार्यवाही न होने पर पुलिस को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ता है। क्योंकि गुस्सा उसी से होता है जिस पर भरोसा होता है।
अपवाद भी हैं:-
हर किसी जगह कुछ न कुछ अपवाद अवश्य रहते हैं पुलिस कई बार भ्रष्टाचार को लेकर भी सुर्खियों में रहती है। पुलिस महकमे को सबसे अधिक भ्रष्टाचारी के रूप में पेश किया जाता है परंतु ये समस्या व्यक्तिगत हो सकती है सिस्टम की नही कई बार समाज इस कलंक को पूरे सिस्टम के माथे पर मढ़ने का प्रयत्न करता है ऐसा इसलिए क्योंकि पुलिस समाज की रक्षक है और उसे भक्षक बनते हुए समाज नही देख सकता अगर पुलिस अपने कर्तव्य से विमुख होगी तो समाज को इसकी बहुत हानि उठानी पड़ेगी। समाज मे असमाजिक कृत्य बढ़ जाएंगे और पथ भ्रष्ट समाज भ्रष्ट राष्ट्र का निर्माता बनता है। इसलिए हम सब ये उम्मीद करते हैं कि पुलिस एक माँ की तरह वात्सल्य और पिता की तरह कठोर प्रेम लेकर समाज की पहरेदारी करे ताकि एक समृद्ध, सशक्त ओर भयमुक्त राष्ट्र का निर्माण हो।

समाज के रक्षक:-
हर कार्य एक फर्ज है और हर कोई इसे बेहतर ढंग से निभाता है परंतु कई बार फर्ज की कीमत आक्रोश, खून, गाली गलौच से भी चुकानी पड़ती है ओर पुलिस कर्मियों को कभी कभी इन्ही बातों का सामना करना पड़ता है। समाज के रक्षक पुलिस कर्मी कई बार लोगो के आक्रोश का केंद्र बन जाते हैं और अपने फर्ज को निभाते निभाते गुमनाम योद्धा की भांति शहीद हो जाते हैं और उनकी शहादत का कोई मोल भी नही पड़ता क्योंकि जंग अपनो से थी, लड़ाई बुराई के खिलाफ थी और सच्चाई कभी किसी के सामने आ ही नही पाती।
आओ मिलकर अपने समाज के रक्षको को सलाम करें और उन्हें खास ओर बहुत खास होने का एहसास दिलाए।

यदि आप पुलिस में हैं तो गर्व करिये कि आप समाज के रक्षक हैं और यदि आप पुलिस में नही हैं तो भरोसा रखिए कि आप की रक्षा के लिए पुलिस है।
जय हिंद ,जय भारत

नोट:- ये मेरे निजी विचार हैं जैसा मैंने महसूस किया है अब तक विभिन्न शोधों के आधार पर। आप इसमें ओर अधिक जोड़ सकते हैं
कृपया अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें।

लेखक परिचय:-

आशीष बहल
चुवाड़ी जिला चम्बा हि प्र
Ph 9736296410
Jbt अध्यापक तथा विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लेखन का कार्य, समाज सेवा के क्षेत्र में जुड़ें हैं तथा समाज के विभिन्न मुद्दों पर लिखते हैं।