ताक़त प्रेम की”
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गिले शिकवे मिट जाते
प्रेम जब दिखता है..!

मिलता नहीं ताक़त
और दौलत से,
जो प्रेम से मिलता है..!

हर चीज़ बिकती है यहाँ,
पर प्रेम नहीं बिकता है..!

झूठ तो यहाँ पनपता नहीं
इक पल नहीं टिकता है…!

भगवान दिखते हैं वहाँ
जहाँ प्रेम दिखता है..!

सब मिल जाता है
मगर प्रेम मुशिकल से मिलता है..!

जहाँ इसका वास है
वहाँ ख़ूब आनंद मिलता है…!

कोई भी पराया नहीं वहाँ
हर एक अपना दिखता है..!

कोई उँच नीच नहीं वहाँ
हर इक इन्सां दिखता है..!

कोई अमीर ग़रीब नहीं वहाँ
हर इक समान दिखता है..!

कोई ख़ास नहीं वहाँ
सबको बराबर सम्मान मिलता है..!

पाना इसको मुकदर की बात है
ये हर किसी को नहीं मिलता है..!

ये प्रेम है किसी किसी को
ही मिलता है…!

उत्तम सूर्यवंशी
किहार चंबा हिमाचल
मो. 8629082280