देशभक्ति
तारीखों पर तो औपचारिक देशभक्ति दिखती है,
असली देशभक्ति की गवाही ,
तपती रेत देती है,
कंपकंपाती ठंड देती है,
रेत और ठंड नतमस्तक होती है,
जवानों के जोश जज्बे को देखकर।

सीमा पे खडे़ जवान,
अपना देशभक्ति का रक्त बहा देते हैं,
ताकि,
देशवासियों का रक्त न बहे।

बर्फीले तूफान में ,
सुनसान रेगिस्तान में,
तैनात जवान,
अपनी जान कुर्बान करते हैं,
ताकि ,रहे तिरंगे की ,
आन बान शान।

हमारी देशभक्ति तो ,
नींद में खो जाती है,
सीमा पर खड़े जवान की देशभक्ति देखिये,
आंखें नींद में होती है,
लेकिन ,
कान दुश्मन की आहट सुनते हैं।

वीपी ठाकुर