कविता स्वतंत्रता दिवस के अवसर

शीर्षक (स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर)
स्वतंत्रता दिवस हमें याद दिलाता, अपनी उपलब्धियों का एहसास कराता।
उन्नीस सौ सैंतालीस से पूर्व भारत की दशा क्या थी, इस बारे विचार विमर्श करने का स्मरण दिलाता।
कितनी कठिनाइयों के दौर से निकले हैं हम, पुरानी जाति प्रथा और रियासत प्रथा पर सोचने को मजबूर कराता।
कितनी विषमताएं थीं जिस कारण पर तंत्र हुए हम, उन सभी न्यूनताओं पर सोचने का अवसर है यह।
स्वतंत्रता दिवस इन सब बातों की है याद दिलाता।
कितनी कुर्बानियों के बाद, स्वतंत्रता हमें मिली है।
कितनी पीढ़ियां इस को पाने मर मिटी हैं।
आज जो सुख सुविधाएं पा रहे इस देश में हम सब।
इनके पीछे कितने निस्वार्थ सेनानियों की कुर्बानियां छिपी हैं।
स्वतंत्रता दिवस कुर्बानियों का प्रतीक है, हमारी सफलताओं और विविधताओं का अतीत है।
यह दिवस याद दिलाता क्रांतिकारियों की कुर्बानियां और वीरांगनाओं की शौर्य गाथाएं।
जिनके बलबूते से देश आजाद हुआ, शक्ति शाली बना देश और भारत गणतंत्र हुआ।
स्वतंत्रता दिवस समर्पित हो, देश के जवान को।
भारत के किसान को और आम इन्सान को।
जिनके बल पर देश आत्म निर्भर बन सका।
विश्व में अतीत का रंग फिर से जमा सका, उस भारत महान को।
सभी चाहें गरीबी न रह जाए अब इस देश में।
सब नागरिक एक समान हों इस समाज में।
राम राज्य स्थापित हो फिर से यहां।
भूखा नंगा न रहे कोई भी इस देश में।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, प्रण लें हम सब।
परिमल सर्वे भवन्तु सुखिनः विश्व बने अब।
नंदकिशोर परिमल, गांव व डा. गुलेर
तह. देहरा, जिला. कांगड़ा (हि_प्र)
पिन – 176033, संपर्क. 9418187358