स्वतंत्रता के 70 साल -सिंहावलोकन

आज जब हम देश की स्वतंत्रता के 70 साल का जश्न मनाने जा रहे हैं तो देश को आजादी दिलाने वाले सैंकड़ों शहीदों व स्वतंत्रता सैनानियों की की कुर्बानियों की याद आना स्वाभाविक है |इनमें हर धर्म, सम्प्रदाय व समुदाय के लोग थे जिनका केवल एक ही ध्येय था, भारत की स्वतंत्रता |15 अगस्त 1947 को जब अंग्रेज सत्ता छोड़ कर गये तो हमारे सामने बहुत सी चुनौतियां थीं |पहली तो साम्प्रदायिक उन्माद को मिटाने की थी क्योंकि आजादी के साथ ही अंग्रेजों ने देश को धर्म के नाम पर दो हिस्सों में बांट दिया था |इस दौरान देश में भयंकर साम्प्रदायिक दंगे हुये तथा व्यापक जनसंहार हुआ |
धीरे -धीरे हम इससे उभरे |26जनवरी1950 को हमने अपना संविधान अंगीकार किया व देश के भविष्य का खाका खींचा |इस दौरान हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है लोकतंत्र का मजबूत होना |भारत में हमेशा ही सत्ता परिवर्तन जनतांत्रिक तरीके से हुआ |आपातकाल के समय को छोड दें तो देश का लोकतंत्र परिपक्व ही हुआ है |आज देश के तीन सर्वोच्च पदों राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति व प्रधानमंत्री की कुर्सी पर साधारण गरीब घरों से आये लोग हैं |फिर भी इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि राजनीति में आज भी भ्रष्टाचार, परिवारवाद व दरबारी संस्कृति हावी है |विचारों के मतभेद मनभेद की हद तक हैं |वोटों के लिए धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र व धन तथा बाहुबल जैसे साधनों का प्रयोग जारी है |
स्वतंत्रता के बाद देश ने आधारभूत संरचना, कृषी, उद्योग, शिक्षा, विज्ञान आदि के क्षेत्रों में अपार सफलता पाई |अंतरिक्ष विज्ञान व सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी में तो हम विश्व में ताकत के रूप में उभरे हैं |अनाज के हमारे पास पर्याप्त भंडार हैं|शिक्षण व स्वास्थ्य संस्थानों तथा सडकों का व्यापक विस्तार हुआ है |देश डिजिटल क्रांति की राह पर अग्रसर है |
स्वतंत्रता सैनानियों ने जिस राष्ट्र का सपना देखा था उसके लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है |हम अपने नागरिकों में अभी भी राष्ट्रीय चरित्र का पूरी तरह निर्माण नहीं कर पाये |आज भी हम पहले धर्म, जाति व समुदाय से जुड़े दिखते हैं देश से बाद में |इसी कारण हम देखते हैं कि विभिन्न धरने प्रदर्शनों के दौरान राष्ट्रीय संपत्ति को खूब नुकसान पहुंचाया जाता है| साम्प्रदायिक दंगे अब भी जारी हैं |1984 के सिख विरोधी दंगे, 1993 के मुम्बई व 2002 के गुजरात दंगे तो बेहद खौफ़नाक थे |
जिस आरक्षण को संविधान में दस वर्ष के लिए रखा था वोटों की राजनीति के चलते आज तक जारी है | अब तो समाज का अपेक्षाकृत समृद्ध तबका भी आरक्षण की मांग कर रहा है | जैसे हरियाणा में जाट, गुजरात में पाटीदार व महाराष्ट्र में मराठा आदि |

आर्थिक असमानता की खाई बहुत बड गई है जिस कारण देश के बडे हिस्से में नक्कसली हिंसा का बोलबाला है | किसान आत्महत्या कर रहे हैं, मजदूर भूखा सोने को विवश है |कश्मीर व पूर्वोत्तर में तो आतंकवाद था ही अब जेहाद के नाम पर जगह जगह उग्रवादी पनप रहे हैं |
अमीरों व गरीबों के लिए देश के मायने अलग अलग हो गए हैं |एक ओर लाखों रुपये फीस लेने वाले स्कूल हैं तो वहीं एक ओर ऐसे स्कूल हैं जहां महज चार रुपये में बच्चों को दोपहर का खाना खिलाया जाता है |जब तक शिक्षा में एकरूपता नहीं होगी समान विकास के अवसर भी नहीं मिलेंगे |देश की बहुत बड़ी आबादी आज भी रोटी, कपडा, मकान, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है |
सरकारी व अदालती काम आज भी ज्यादातर अंग्रेजी में हो रहा है |न्याय मिलने में दशकों लगना आम बात है | समाज में महिलाओं, दलितों, वंचितों के खिलाफ हिंसा जारी है |बुजुर्गों का सम्मान कम हो रहा है, वृद्धाश्रम संस्कृति बड रही है |विश्व की बहुत बड़ी कुपोषित व भूखी आबादी हमारे यहाँ है |जनसंख्या नियंत्रण में भी हम असफल रहे हैं |नदियों, पहाडों, वनों, मैदानों व समुद्री तटों पर अथाह प्रदूषण है, मानसिक, सामाजिक व राजनीतिक प्रदूषण भी जोरों पर है |
इस सबके बावजूद हमारी उपलब्धियां कम नहीं हैं |जरूरत है नागरिकों में राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण व समाज में नैतिक मूल्यों की पुनः स्थापना करने की | आइये आज प्रण करते हैं कि देश को श्रेष्ठ बनाने व स्वतंत्रता सैनानियों के सपनों को साकार करने के लिए मिल कर काम करें |

संजीव कुमार
गांव व डाकघर च्वाई
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