तिरंगा
तिरंगे के जो हैं ये रंग तीन
नापाक सपौले को नचाएँगे ये बजा बीन आतंक की जो है ये मशीन
आतंकी है जिसके जानशीन
खून खराबे के जो हैं शौकीन
अशोक बन सुदर्शन करेगा चिर निद्रा में लीन
तिरंगे के जो हैं ये रंग तीन
नापाक सपौले को नचाएँगे ये बजा बीन
देखो तुम रंग केसरिया सफेद और हरा
देश मेरा है बन के एक तारा जैसे उभरा
शोर्य देख सेना का आसमान हो रहा केसरिया
बुध गाँधी की धरती पे कपोत सफेद है सदा उड़ा
खुशहाली की दहलीज पर भारत आज है खड़ा
भगवा है और है हरा भी कंधे से कंधा मिला खड़ा
हिम्मत है गर हिमाकत की तो क्यों है इतना डरा
हिन्दू जल सकते हैं तो सकते है किसी भी दुष्ट को जला
मुस्लिम भी वतन के लिए सकते है किसी शैतान को दफना
सिक्खों ने जो लिया एक बार नाम वाहे गुरु जी का ध्या
तुम दो चिड़ियों की क्या मजाल जायेंगे हम सवा लाख से लड़ा
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई भाई है देंगे दिखा तू सामने तो आ

विश्व विजयी ये तिरंगा हमारा दिलों को जीतना है काम हमारा
वन्दे मातरम् नहीं है बस एक नारा प्रण है ये है ये प्राण हमारा
सीमा है ये हमारे वतन की नहीं किसी की खाला जी का बाड़ा
अरे राम रहीम की निगेहबानी में है देश का मेरे हर एक किनारा
समरसता व भाईचारे का संदेश देता तिरंगा हमें है जान से प्यारा
स्वछन्द गगन में लहराते तिरंगे का लगता हमें है हर रंग न्यारा

इसकी तरफ उठने वाली हर आँख को दिखेगा हमारी आँख में अंगारा
वक्त आने पे हिफाज़त के लिए इसकी लड़ेगा देश का हर इक बंजारा
तिरंगे का स्वप्न देखे बिना सोता नहीं सरहद पे कोई भी सैनिक हमारा
तूफानों की तो तू भी ना कर आंधी में भी जो न डिगे ये है वो पताका
हर जात, मजहब, प्रान्त से ऊपर है तिरंगे से इक भारत वासी का नाता
आज भी है रक्षा में इस देश की सरहद पे खड़ा सैनिक अपना लहू बहाता

जय हिन्द …

युद्धवीर टंडन (कनिष्ठ आधारभूत शिक्षक रा. प्रा. पा. अनोगा) गावं तेलका जिला चम्बा हि. प्र. पिन कोड 176312 मोब. 78072-23683