कृष्ण/कविता/नवीन शर्मा

“कृष्ण”

कृष्ण-कृष्ण कहा कहाँ,
कृष्ण नहीं हैं आय।
भीतर बाहर कृष्ण हैं,
कृष्ण पुकारा जाय।।

कृष्ण कृष्णमय ना भया,
कृष्ण मना मजबूर।
कृष्णा तृष्णा त्याग दी,
कृष्ण कृपा भरपूर।।

कृष्ण कहूँ हे कृष्ण हे,
कृष्ण हरो भव रोग।
आकर्षण हो कृष्ण का,
कृष्ण कृष्ण संयोग।।

“जय श्रीकृष्ण”

नवीन शर्मा ‘नवीन’
गुलेर -हिमाचल
176033
📞9780958743

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