जन्माष्टमी/नवीन हलदूणवी

नवीन हलदूणवी

“जन्म-अष्टमीं ध्याड़ैं इत्थू,
लोक्की मौज़ डुआंदे ।

संझ सबेल्ला किट्ठे होई ,
ठाकुरद्वारैं जांदे ।

रावण-कंस कदीं नीं बणने,
लोक्कां दा गल़-हार ।

गीता-ई उपदेस कृष्ण दा,
बोल्ला करदे प्हाड़ ।।”

नवीन हलदूणवी
काव्य-कुंज जसूर- 176201,
जिला कांगड़ा , हिमाचल l

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