“कृष्ण फ्रोम गोकुलवाला”..

ठुमक – ठुमक जब चलन लगे,
पग धरती पर जब थिरकन लगे,
माखन खाए , सबको भाए.
देखो वृन्दावन में ,
हैं कौन आए…

मटकी तोडे, गगरी फोडे..
रास वृन्दावन में नटखट कराए..
ऐसा रास करायो कि..
भोले बाबा नारी बन वृन्दावन आए…

पूतना का संघार किए,
कंस को बो हैं मार गिराए…
राधा संग हैं प्रेम कियो,
मुरलीवाला,माखनचोर बो कहलाए…

सुनकर भगतन की अरदास,
वो नंगे पाँव दौडे चले आए..
भगत सुदामा के चावल वो,
प्रेम से हैं भोग लगाऐं..

अरे देखने मेरे गिरिधर की लीलाएँ..
एक बार वृन्दावन जायें..

कहता है “राहुल”
सुन लो भगतों
प्रभु को निरछल मन है अति भाए…..
बाँसुरीवाला, दुख हरने वाला…
वो कृष्ण वासुदेव यादव
फ्रोम गोकुल वाला कहलाए..
गोकुल वाला कहलाए…

राहुल सुन्दन
चुवाडी..
9882248097