जीवन की हर काया में ,हर छाया में है वास तेरा।
अनमोल तुम्हारा जीवन है,है नेह भरा अनुराग तेरा।।
माँ बनकर धरती पर तूने,अनमोल सृष्टि रच डाली है।
नारी तुम श्रद्धा हो केवल,ममता तव दिव्य निराली है।।
जब बहन बनी तब हाथ सजे,माथे पर रोली सजा दिया।
बनकर पत्नी जब साथ दिया,तब भाग्य विभव का जगा दिया।।
जब पुत्री बनकर आयी तुम,सौभाग्य भवन में जगा दिया।
घर के दुःख दारिद को तुमने, बन अन्नपूर्णा भगा दिया।।
Dr. Meena kumari