धीरे धीरे
हो रहे हैं दूर वो सभी धीरे धीरे
आए थे पास जो कभी धीरे धीरे

साथी नया कोई उनको मिला है
बना बैठे दूरी वो तभी धीरे धीरे

दिल उनके नाम कर ही दिया था
देखना ले लेंगे जान भी धीरे धीरे

छोड़ते नहीं किसी क़ीमत भी वो
गिरे अपने मगर दाम भी धीरे धीरे

मजबूरी कोई तो उनकी भी होगी
समझेंगे हम उनको अभी धीरे धीरे
— भूपेन्द्र जम्वाल ‘भूपी’