“दुनियाँ समझ न आए”
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अपने दर्द पर सब रोए
दुसरों के हँसी उड़ाए
ये दर्द उनका अपना है
पर समझ न पाए…!

टूट टूट पड़ जाए
जो भी उसे समझाए
जिसकी छीन ख़ुशी
उसे ही गाली सुनाए…!

खरी बात बुरी लगे
झूठ पे ताली बजाए
इक पैसा न दान दें
दारू जुए में धन लुटाए….!

माँ बाप छोड़े आश्रम
पत्नी से मौज मनाए
अपनों से बात तक नहीं
ग़ैरों को गले लगाए…!

दुसरों के देखे दोष
अपने नज़र न आए
सच छुपाते छुपाते
झुठ बड़ता जाए…!

देख ये हालत ‘उत्तम’
दुनियाँ समझ न आए…!!

उत्तम सूर्यवंशी
गाँव तलाई किहार
चंबा हिमाचल
8629082280