गज़ल/द्विजेन्द्र द्विज

जितना दिखता हूँ मुझे उससे ज़ियादा न समझ
इस ज़मीं का हूँ मुझे कोई फ़रिश्ता न समझ

ये तक़ल्लुफ़[1] है इसे हर्फ़े तमन्ना[2] न समझ
मुस्कुराहट को महब्बत का इशारा न समझ

यह तेरी आँख के धोखे के सिवा हुछ भी नहीं
एक बहते हुए दरिया को किनारा न समझ

एक दिन चीर के निकलेंगे वो तेरी आँतें
वो भी इन्साँ हैं उन्हें अपना निवाला न समझ

वो तुझे बाँटने आया है कई टुकड़ों में
मुस्कुराते हुए शैताँ[3] को मसीहा न समझ

जिन किताबों ने अँधेरों में डुबोया है तुझे
उन किताबों के उजाले को उजाला न समझ

छोड़ जाएगा तेरा साथ अँधेरे में यही
यह जो साया है तेरा इसको भी अपना न समझ

यह जो बिफरा तो डुबोएगा सफ़ीने[4] कितने
तू इसे आँख से टपका हुआ क़तरा न समझ

है तेरे साथ अगर तेरे इरादों का जुनूँ
क़ाफ़िला है तू कभी ख़ुद को अकेला न समझ

तुझ से ही माँग रहा है वो तो ख़ुद अपना वजूद[5]
ख़ुद जो साइल[6] है उसे कोई ख़लीफ़ा[7] न समझ

बढ़ कुछ आगे तो मिलेंगे तुझे मंज़र[8] भी हसीँ
इन पहाड़ों के कुहासे को कुहासा न समझ

साथ हैं मेरे बुज़ुर्गों की दुआएँ कितनी
मैं हूँ महफ़िल तू मुझे पल को भी तन्हा न समझ

शाइरी आज भी उनकी है नई ‘द्विज’ ख़ुद को
ग़ालिब-ओ-मीर या मोमिन से भी ऊँचा न समझ

द्विजेन्द्र द्विज

लेखक परिचय
*विवरण*

नाम : द्विजेन्द्र शर्मा
लेखकीय नाम: द्विजेन्द्र ‘द्विज’
पिता का नाम :स्व. मनोहर शर्मा ‘साग़र’ पालमपुरी
जन्म तिथि: 10 अक्तूबर,1962
स्थाई पता:अशोक लॉज , मारंडा-176102
शिक्षा : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सेन्टर फ़ार पोस्ट्ग्रेजुएट स्टडीज़, धर्मशाला से
अँग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर डिग्री
व्यवसाय:सरकारी नौकरी
लेखन भाषा:हिंदी,पहाड़ी,अंग्रेज़ी,उर्दू
विधाएँ:ग़ज़ल,कहानी,समीक्षा,अनुवाद।
प्रकाशित कृतियाँ : जन-गण-मन (ग़ज़ल संग्रह) प्रकाशन वर्ष-2003. संग्रह की 250 से अधिक समीक्षाएँ राष्ट्र स्तरीय पत्रिकाओं एवं समाचार—पत्रों में प्रकाशित।
सम्पादन :डा. सुशील कुमार फुल्ल द्वारा संपादित पात्रिका रचना के ग़ज़ल अंक का अतिथि सम्पादन
संकलन :
दीक्षित दनकौरी के सम्पादन में ‘ग़ज़ल …दुष्यन्त के बाद’ (वाणी प्रकाशन),
डा.प्रेम भारद्वाज के संपादन में सीराँ (नैशनल बुक ट्रस्ट),
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ की पत्रिका साहित्य भारती के नागरी ग़ज़ल अंक,
डा.पीयूष गुलेरी के सम्पादन में किरनी फुल्लां दी (नैशनल बुक ट्रस्ट),
डा.प्रत्यूष गुलेरी के सम्पादन में हिमाचली लोक कथाएँ(नेशनल बुक ट्रस्ट),
रमेश नील कमल के सम्पादन में दर्द अभी तक हमसाए हैं
इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी द्वारा संपादित चांद सितारे
नासिर यूसुफ़ज़ई द्वारा संपादित कुछ पत्ते पीले कुछ हरे इत्यादि संकलनों में संकलित
रचनाएँ प्रकाशित : नया ज्ञानोदय, नवनीत,लफ़्ज़, शोध दिशा, उद्भावना,हिमाचल मित्र, नयापथ, जनपथ , अनभै सांचा, मसि कागद, हरिगंधा,बराबर, सुपर बाज़ार पत्रिका, इरावती, विपाशा, हिमप्रस्थ, कारख़ाना, अर्बाब-ए-क़लम, गुफ़्तगू, गोलकोंडा दर्पण, क्षितिज, ग़ज़ल, नई ग़ज़ल सार्थक, शीराज़ा(हिन्दी), पुन:, तर्जनी, शब्दसंस्कृति, शिवम, उद्गार, भभूति, पोइटक्रिट, हिमाचल मित्र, संवाद, सर्जक, रचना, फ़नकार, इत्यादि पत्रिकाओं में।

दैनिक ट्रिब्यून ,जनसत्ता, इंडियन एक्सप्रेस, लोकमत समाचार, राष्ट्रीय सहारा, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अजीत समाचार, भारतेन्दु शिखर, गिरिराज, दैनिक मिलाप, वीर प्रताप,पंजाब केसरी, दिव्य हिमाचल, अजीत समाचार इत्यादि समाचार पत्रों में।

विशेष : कई राष्ट्र एवं राज्य स्तरीय कवि सम्मेलनों /मुशायरों में प्रतिभाग।
बहुत-सी ब्लाग और वेब पत्रिकाओं में भी ग़ज़लें, अनुवाद और आलेख प्रकाशित।

अंदाज़-ए-बयाँ (दैनिक ट्रिब्यून),शायरों की महफ़िल(पंजाबकेसरी), महफ़िल-ए-शेर-ओ-अदब (अजीत समाचार) में शे‘र प्रकाशित।
पहाड़ी भाषा में ग़ज़लें, कहानियाँ
आकाशवाणी, रेडियो स्टेशन डेनमार्क से गज़लें प्रसारित
सदस्य: कविताकोश टीम
सम्प्रति : विभागाध्यक्ष:अनुप्रयुक्त विज्ञान एवम् मानविकी, ग़ज़लकार, समीक्षक,कहानीकार, अनुवादक।
सम्पर्क :dwij.ghazal@gmail.com

सम्मान:*हिमोत्कर्ष साहित्य संस्कृति एवं जन कल्याण परिषद ऊना हिमाचल प्रदेश द्वारा *लुद्दरमल कटोच स्मारक हिमोत्कर्ष श्री (उत्कृष्ट साहित्यकार) पुरस्कार* 2009-2010 से सम्मानित।

*ग्लोबल कम्यूनिटी एवं रेडियो सबरंग डेनमार्क द्वारा 2016 में सम्मानित*

*काँगड़ा लोक साहित्य परिषद् नेरटी द्वारा परम्परा उत्सव सम्मान- वर्ष 2017

पता:राजकीय पॉलीटेक्निक ,काँगड़ा-176001(हि.प्र.)

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