कुदरत/पं अनिल

कुदरत 🙏🙏

बेदिली अपनों से गैरों से मुहब्बत ।
खूब लोगों ने बना ली है ये फ़ितरत ।।

साफ़गोई अब कहीं दिखता नहीं ।
ये किसी बाज़ार में बिकता नहीं ।।
आसमाँ में घर बनाने की है हसरत ।
खूब लोगों•••••

हाथ दो ही हैं तेरे लेनें को बंदे ।
पाल रक्खे हैं बहुत गफ़लत के धंधे ।।
देनें को रखती हज़ारों हाथ कुदरत ।।
खूब•••

जोड़ ले तूने बढ़ाई कितनी दौलत ।
क्या पता पाये न पाये और मोहलत ।।
जादूगर वो ले रहा हर पल ख़बरत ।।
खूब••••

दिन फिरेंगे फ़िर अनिल रख हौसला ।
वो मदारी छिप करे है फ़ैसला ।।
उसके दिल न जगह पाती कोई नफ़रत।
खूब••••

🙏 सुप्रभातम् 🙏

🌹 पं अनिल 🌹
अहमदनगर महाराष्ट्र

One comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *