ग़ज़ल आपकी नजर

लौट आओगे यही दिल को खबर करते रहे
आरजू की झोंपडी को हम नगर करते रहे

था बड़ा मौसम सुहाना हम मिले थे जिस घड़ी
दी सदा मंज़िल ने लेकिन हम डगर करते रहे

जब जुदा जिस पल हुये तुम भी रोये हम भी रोये
यादें जीं लीं यादें पी लीं हम गुज़र करते रहे

जर्द पत्तों सी राहें हैं कोई भी साया तो नहीं
आंसुओं से सींच कर ग़म को शजर करते रहे

नोचते हैं दिन अकेले चीरती यह ज़िंदगी
आधे जीकर रात रोकर मुख़्तसर करते रहे

हर तरफ सूनी है बादी सारथी है हाल यह
वो भी तन्हा हम भी तन्हा बस बसर करते रहे।

मोनिका शर्मा सारथी