कविता/पं अनिल

👨‍🎨घर लौट पाया नहीं👨‍🎨

सोते सोते सैनिकों के सिर ले गये हैं काट ,
सैनिकों के लिये कभी स्नेह दिल आया नहीं ।
चोटियाँ कटीं दो चार सिर के तो काँप गये ,
सैनिकों के सिर हेतु दिल घबराया नहीं।।

अपनें कलेजे पे जो चोट लगी रोने लगे ,
सैनिकों के मान सम्मान को बढाया नहीं।
वो भी तो हैं लाल किसी माँ से पूछ लेना हाल,
बीर गति पाया पूत घर लौट पाया नहीं।।

भारतीय शान का तिरंगा है प्रतीक प्यारे ,
बहुत दिनों से हँस कर लहराया नहीँ ।
लिपटे हैं मौन जो गरजते थे सीमा पर ,
उसके लिये दो बोल कोई बोल पाया नहीं।।

सरकारें सो रहीं हैं माता बहू रो रहीं हैं ,
कोई नेता अभिनेता देखो शरमाया नहीं।
जय हिंद, हिंद सेना तेरा है जबाब नहीं ,
तूनें दुश्मन को है पीठ दिखलाया नहीं।।

🙏 सुप्रभातम् 🙏
🌹पं अनिल 🌹
अहमदनगर महाराष्ट्र
📞 8968361211

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