ग़ज़ल/संजीव सुधांशु

गजल
हर जबाब से पैदा इक सवाल होता है,
सोचते ही नहीं ऐसा कुछ का मिजाज होता है |
खून पसीना एक करके चुकाते रहो ज़िन्दगी भर,
है जो नमुक्कमिल वो महाजनों का हिसाब होता है |
हमें इल्जाम दिया दुनिया ने वफा का मुहब्बत का,
तू मुन्सिफ है ऐ खुदा देखें क्या तेरा इन्साफ होता है |
कतरा कतरा आज लहू का शराब हो जाने दो,
लुट जाता है कोई जब तो हमसफ़र शराब होता है |
सूरज चांद सितारे सब निकलते हैं वक्त से यहां,
अजीब है वजूदे जहां जरूर कोई तो खुदा होता है |
कसमसाती तडफती ज़िन्दगी से हटकर देखो सुधांशु,
जहां में कहीं तो सकूं शोखियां शराब ओ शबाब होता है |
संजीव कुमार सुधांशु
गांव व डाकघर च्वाई
त. आनी जिला कुल्लू
हि. प्र.
172032
मो. 94182-72564
70188-33244.

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