लोग मुस्कुरायेंगे ?

अब नहीं दिल को आजमायेंगे ।
ज़ख़्म देखेंगे लोग मुस्कुरायेंगे ।।
हाल-ए-दिल किसे हम सुनायेंगे ।
ख़ून-ए-जिगर किसे हम दिखायेंगे ।।

यूँ तो ग़म और भी हैं इस जमाने में ।
दर्द होता ही नहीँ अब चोट खाने में।।
तौबा तौबा अब दिल नहीं लगायेंगे।
ज़ख़्म • • •

दर्द से अपना भी खूब है नाता ।
बिना तड़पाये नहीं है रह पाता।।
हम भी उफ़ तक नहीं लबों पे लायेंगे ।
ज़ख़्म • • •

वक़्त मरहम है ,हर दर्द , फ़ना करता है।
कुदरत चाहे जो बिगड़ता है बना करता है।।
वो तो हाक़िम हैं सब समझ जायेंगे।
ज़ख़्म • • • •

? सुप्रभातम्?

? पं अनिल ?

अहमदनगर महाराष्ट्र
? 8968361211