माँ से मिला जन्म,
बहन ने संवारा जीवन
भूल गये सब यह कहानी
नजर नहीं आता वोह सपूत
निकलता हो जो माँ को कर प्रणाम ,
बहन की जिद्द जिसने मानी है।।

माँ के बिन घर शमशान लगता है
बहन न दिखे नुक्सान छलता है
भूल गये बात कही सयानी है,
पावन रिश्तों की वोह धरोहर,
माँ_ बहन न कभी सतानी है।।

माँ को जो सताता है,
पाताल का दर वोह पाता है
बहन को जो घर नहीं बुलाता है,
किस्मत उसकी फूटती ही जानी है,
निन्दा नारी करना जिसने ठानी है।।

माँ कह कर देखिये,
सारा जहाँ चरनों में नदर आता है
बहन को मना कर देखिये,
शकून कितना मन को आता है,
किसमत रातों रात बदल जानी है,
इसकी शास्त्रों में मिल कहानी है।।
जग्गू नोरिया