देशभक्ति रचना

ऐ मेरे वतन मेरे मेरे महके चमन
है तुझपर मेरी जां अर्पण -2

तेरे जलवे में मैंनें देखा
हिंदु ,मुस्लिम, सिख सब हैं सखा
हम मोती हैं रंग भिन्न भिन्न है
तू है हम सबका इक दर्पण

ऐ मेरे वतन मेरे…………

ये धरती देवों की सारी
यहाँ राम ,कृष्ण राधा प्यारी
कहीं और नहीं ऐसा पावन सीता सा नहीं कोई समर्पण

ऐ मेरे वतन……

पर आज ये कैसे दिन दाता
भ्रष्ट नाग नें देश को है काटा
कैसा यह बिष फैला है भ्रष्ट
करती है रूह मेरी तर्पण

ऐ मेरे वतन मेरे महके …..

मोनिका शर्मा सारथी