कविता/उत्तम सूर्यवंशी

सब एक समान”
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ख़ुदा ने बनाया इन्सान,
हम बन गये …
हिंदू,सिख,इसाई, ‘मुसलमान …!
चीर के देखो जिस्म अपने,
सबमें ख़ून एक समान…!

ख़ुदा ने दी एक धरती,
हमने कर दिये टुकड़े,
जैसे भारत,रुस ,आमेिरका,पाकिस्तान .!

सब एक ही माला के फूल हैं,
सबको इक ने बनाया,
ये क्यों नहीं समझे इन्सान …!

अपनी शनौ शौक़त के ख़ातिर,
कयों करता है, किसी को परेशान “उतम,कहे मिल कर रहो ,
प्यार से क़ायम हो भाईचारा,
तो ख़ुशहाल हो पाऐगा विश्व हमारा..!!

उत्तम सूर्यवंशी
गांव तलाई डा. किलोड
ते. सलूनी ज़िला चंबा (हि.प.)
पिन कोड ..176320
मो.न. 8629082280

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