चिंता

चिंता करने का कोई कारण हो साहब ये जरूरी तो नहीं
चिंता हर एक को ही हो यह भी जरूरी तो नहीं
देखो कहीं यह किसी की मजबूरी तो नहीं
सिन्धुर पड़ा है जल में या ये जल ही सिन्धुरी तो नहीं
चिंता करने का कोई कारण हो साहब ये जरूरी तो नहीं

चेहरे से न दिखने वाला वो शख्स भी कहीं मजबूर तो नहीं
आँखों में ख़ुशी लिए हुए है जो सपने उसके कहीं चूर तो नहीं
रसूखदार पूछते हैं? पत्थर तोड़ता ये शख्स कहीं मजदूर तो नहीं
चिंता छोड़ो ये कहना इस जमाने का कहीं कोई दस्तूर तो नहीं
हर बात को बड़ी शिदत से सुनते हैं कहीं ये हमारा कसूर तो नहीं

माथे पर शिकन पड़ी हो उसके ऐसा कोई दिल चाहता तो नहीं
अब कहे कोई कितना भी हर कोई अपना भाग्य विधाता तो नहीं
पानी से प्यास ना बुझे फलसफा ये भी समझ में आता तो नहीं
ये वक्त बदल जायेगा, ठीक है ! सोच लेने से बदल जाता तो नहीं
अरे भई उल्लू नहीं हैं हम क्या करे रात हो तो नजर आता नहीं

वाजिब हो, तो चिंता करना गलत है, ऐसा कहीं परिभाषित नहीं
डूबो चिंता में गर लगता है कि डूबे बिना तरना अनुमानित नहीं
ना देखना हो तो बिन चश्में के भी आँखें चुराना अकल्पित नहीं
हर तरफ हो गर तिमिर छाया तो भी चलते रहना उचित नहीं
चिंता निरर्थक है ऐसा कहना भी तो साहब पुर्णतः वास्तविक नहीं

जय हिन्द …

युद्धवीर टंडन (कनिष्ठ आधारभूत शिक्षक रा. प्रा. पा. अनोगा) गावं तेलका जिला चम्बा हि. प्र. पिन कोड 176312 मोब. 78072-23683