शीर्षक (कुट)
कुट एक खेत का नाम है, गुलेरी बंधुओं का जहां योगधाम है।
उन्नीस सौ छिहत्तर में मौरूसी मुजारों से छुड़वा कर।
पुनः खरीदा गया, जड़ोटिए पुरोहितों का पुराना खेत है।
पं. कीर्ति धर जी के प्रयास से, उनकी संतानों के अटूट विश्वास से।
पुनः गुलेरी बंधुओं ने बंजर खेत को आबाद किया।
एक छोटा सा मकान बना, खेत को खेती योग्य बनाने का प्रयास किया।
एक जोड़ी बैल खरीद कर, खुद हल चला कर।
सजाया, बनाया और खेती के लिए तैयार किया।
मक्की लगाई, जंगली जानवरों से बचाया और अस्सी मन की फसल उगा कर नया कीर्ति मान पेश किया।
सब लोग हैरान थे, बोलते इक जुवान से,
पुरोहितों के बेटों ने है क्या कमाल किया!

समय बदला परिस्थितियां बदलीं, खेत फिर वीरान हुआ।
जो मकान था वह भी सुनसान हुआ।
योगेश्वर ने मकान को योगधाम हेतु पिता जी से ले लिया।
कुछ समय के लिए रौनक मकान में लौटी, लेकिन खेत वीरान का वीरान रहा।
दिसम्बर दो हजार दस में योगेश्वर को पक्षाघात हुआ।
मकान गिरने के कगार पर था, माता जी पर मानसिक भार था।
सब ने विचार किया, मकान की मरम्मत हुई और खेत संभालने पर विचार हुआ।
खेत में जो झंखाड़ थे, जे सी पी द्वारा समतल करा कर उनका सुधार किया।
गुलेरी बंधुओं ने एकता का प्रमाण दिया।
चार हजार सफेदा के पेड़, तीन सौ सागवान और अनेक फलदार व रसीले आम लगा कर।
कुट को नया अवतार दिया।
कंटीली तार लगी, गेट लगा और पेड़ों को संभालने का इंतजाम किया।

आज कुट आबाद है, खुशियों का वहां राज है।
हरियाली बंजर खेत में फिर से गूंजती, खेत फिर से आबाद है।
कुट आज गुलेरी बंधुओं की एकता का प्रतीक है।
यह हमारे बुजुर्गों की पहचान है, कुट प्यार का प्रमाण है।
परिमल कहे कुट एक खेत नहीं, यह तो गुलेरी बंधुओं की आन, बान और शान है।।
नंदकिशोर परिमल, गांव व डा. गुलेर
तह. देहरा, जिला. कांगड़ा (हि_प्र)
पिन. 176033, संपर्क. 9418187358