कविता/पं अनिल

रहम किया कर 🙏

बेदिली से जरा निकल कर ,
कभी तो दिल की सुन लिया कर ।
बिखरा बिखरा सा प्यार है जो ,
कभी तो प्यारे चुन लिया कर ।।

कभी तो रख ले मिज़ाज नरमी ,
कभी तो तल्ख़ी दफ़न किया कर ।
कभी सुकून की साँसें भर कर ,
कभी तो ज़िदगी बुन लिया कर ।।

साथ कर ले चहल क़दमीं ,
बहारों पे मत सितम किया कर ।
रंजो ग़म कर दरकिनारे ,
कभी तो खुद पे रहम किया कर ।।

आपाधापी है अनिल,पर,
सौदेबाजी कम किया कर।
साथ नेकिया ही चलेगी
कभी तो नेकी करम किया कर ।।

🙏सुप्रभातम् 🙏

🌹पं अनिल🌹
अहमदनगर महाराष्ट्र
📞 8968361211

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