गीत/ राकेश मल्होत्रा

बांकी छैल छबीली गोरी
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सुंदरता का रस टपकाये
बांकी छैल छबीली गोरी
फूल नुमा है खिलती जाये
बांकी छैल छबीली गोरी

बिजुरी अम्बर में लहराये
घोर घनेरे बादल छाये
दूर खङी मुस्काये गोरी
बांकी छैल छबीली गोरी

तेज़ हवायों में हलचल है
झरनों में भी कल कल कल है
चले चाल मतवारी गोरी
बांकी छैल छबीली गोरी

सावन बरसे धूम मचाये
अम्बर से मोती बरसाये
रुप-सुधा छलकाये गोरी
बांकी छैल छबीली गोरी

©राकेश मल्होतरा ‘नुदरत

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