शायरी/अजय बालोतरा

1) जाते जाते कोई दिल को पत्थर कर गया
अब ये दिल किसी के लिए धड़कता ही नहीं।
2) वफादार ओर तुम ख्याल अच्छा है
बेवफा ओर हम इलज़ाम भी अच्छा है।
3) दिल में जो है साफ कह दो
फैसला, फासले से बेहतर है।
4) कोन कहता है तेरी याद से बेखबर हुँ मैं ???
जरा बिस्तर की सिलवटों से पूछ मेरी रात कैसे गुजरती है।
5) दिन तो कट जाता है शहर की रौनक में कुछ लोग
याद बहुत आते है दिन ढल जाने के बाद।
6) हवा के साथ उड़ गया घर इस परिंदे का
कैसे बना था घोसला वो
तूफान क्या जाने !
अजय बालोतरा

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