मेरा नसीब रुठा है ..

ना हाल ना ख़बर
आज चुप चाप हो गये

कैसे हो तुम सालों का प्यार
पल में भुला गये

तुम्हें समझने को
बहुत वक़्त लगता है

कैसे समझोगे मेरे दिल का दर्द
तुम्हें तो मेरी बातों का फिकर ही नहीं

सिर्फ़ बातें बनाने से प्यार नहीं दिखता
आँख खोल कर देखो कितना दर्द है

तूने अपनी बातों में जोर दिया है
वास्ता देकर आज दर्द दिया है

तुझे बेवफा कह नहीं सकता
प्यार में रुसवाई हो सकती है

तू साथ है आज भी मुझे महसूस है
दुनिया का ख़ज़ाना तेरे प्यार में कम है

सोचता हूँ ये जिंदगी
तेरे साथ ही बिताऊंगा

पर तेरे रुसवाई से लगाता है
मेरा नीसीब शायद रूठ गई है

राम भगत