गजल
उनसे मिलकर जज्बातों को लफ्ज नहीं मिल रहे हैं,
दिल बयां कर रहा है मगर लव सिल रहे हैं |
आसमां आज जमीं पर फूल बरसा रहा है,
लगता है कहीं दो पाक दिल मिल रहे हैं |
बहुत शोर सुनते थे तुफान आने का,
पर ये क्या यहां पत्ते भी नहीं हिल रहे हैं |
हवाओं से उनके आने की खबर सुनकर,
मौसमे खिजां में भी फूल खिल रहे हैं |
मुहब्बत क्या है उनसे मिलकर जाना हमने,
न जाने हमें किन नेकियों के सिले मिल रहे हैं |
धोखों औ’ दिखावों से भरी पडी है यह दुनिया,
खुशनसीब हैं जिन्हें आप जैसे दोस्त मिल रहे हैं |
अलग राहों के मुसाफिरों को मिला देती है ज़िन्दगी,
तभी तो सुधांशु इस मुकाम पे हम मिल रहे हैं |
संजीव कुमार सुधांशु
गांव व डाकघर च्वाई
त. आनी जिला कुल्लू
हि. प्र.
172032
मो. 94182-72564.