कविता/पं अनिल

चलना पड़ेगा 🏃🏃

सिर झुकायेगा जमाना शर्त है पर । लीक से हट कर तुम्हें चलना पड़ेगा ।।

मुश्किलें आयेंगी आती ही रहेंगी ।
थोड़ा सा डँट कर तुम्हे चलना पड़ेगा ।।

हर सहर की शाम होती फ़िर सहर है ।
पहर सा सट कर तुम्हें चलना पड़ेगा ।।

दौड़ना गिरना मगर फ़िर दौड़ जाना ।
तिल तिल कट कर तुम्हें चलना पड़ेगा।।

हद नहीं दरिया का होता है कहीं ।
वक़्त पलट कर तुम्हें चलना पड़ेगा ।।

तोड़ना तारे अनिल आसान है बस ।
मग़रूरियत पटक कर तुम्हें चलना पड़ेगा ।।

🙏 सुप्रभातम् 🙏
🌹 पं अनिल 🌹
अहमदनगर महाराष्ट्र
📞 896836121

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