कविता/अशोक दर्द

बेटी
धरती का श्रृंगार है बेटी |
कुदरत का उपहार है बेटी ||

रंग-बिरंगे मौसम बेशक |
जैसे ऋतू बहार है बेटी ||

कहीं शारदा कहीं रणचंडी |
चिड़ियों की उदार है बेटी ||

दो कुलों की शान इसी से |
प्रेम का इक संसार है बेटी ||

इस बिन सृजन न हो पायेगा |
धरती का विस्तार है बेटी ||

बेटी बिन जग बेदम-नीरस |
जग में सरस फुहार है बेटी ||

मधुर-मधुर एहसास है बेटी |
पूर्णता-परिवार है बेटी ||

धरती का स्पन्दन है यह |
ईश-रूप साकार है बेटी ||

बेटे का मोह त्यागो प्यारे |
नूतन-सृजन-नुहार है बेटी ||

कुल की शान बढ़ाये बेटी |
मत समझो कि बहार है बेटी ||

दिल की बातें दर्द सुनाये |
अपने तो सरकार है बेटी ||

अशोक दर्द
जिला चम्बा
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